विशाल उत्तरी अमरीकी महाद्वीप के बीच के हिस्से में एक बंजर और घिनौना रेगिस्तान है, जो कई सालों तक सभ्यता की तरक्की में बाधा बना रहा. सियरा निवाडे से नेब्रास्का तक और उत्तर येलोस्टोन नदी से ले कर दक्षिण में कोलाराडो तक पूरा इलाका उदासी और निस्तब्धता से भरा है. इस मनहूस से इलाके में कुदरत भी हमेशा एक रूप में नहीं रहती. यहां पर बर्फ से ढके विशाल पर्वत भी हैं और अंधेरी, उदास वादियां भी, यहां रफ्तार से बहती नदियां हैं जो टेढ़ेमेढ़े पहाड़ी दरों से हो कर गुजरती हैं. यहां विशाल मैदान हैं, जो सरदी में बर्फ से सफेद रहते हैं और गरमी में क्षारयुक्त, ऊसर धूल से मटमैले. पर ये सभी बंजर, न रहने योग्य और दुख से भरपूर होने के कारण एकसमान भी हैं.
हताशा के इस इलाके में कोई भी निवासी नहीं है. कभीकभार दूसरी जगह जाने के लिए पौनी या ब्लैक फुट कबीलों के जत्थे गुजरते हैं, दूसरी जगह जाने के लिए जहां शिकार आसानी से मिल जाते हैं, पर बहादुर से बहादुर भी इन मैदानों को पार कर के घास के मैदानों में अपने को पाने पर राहत की सांस लेता है. झाड़ियों में कोयोट (भेड़िया) छिपे रहते हैं, बाज भारी शरीर से हवा में उड़ता है और भूरे बालों वाला भालू अंधेरी पहाड़ी नदियों में भद्दे तरीके से चलता हुआ चट्टानों के बीच से खाना ढूंढ़ता है, इस बियाबान में यही निवासी है.
पूरे संसार में सियरा ब्लैंको के उत्तरी ढलान से ज्यादा मलिन कोई दूसरा नजारा नहीं है. जहां तक नजर जाती है, यह चपटा मैदान ही दिखाई देता है, जिस के बीच बीच में क्षार के धब्बे हैं और बौनी चप्पराल झाड़ियों के गुच्छे. क्षितिज के दूसरी ओर पर्वत चोटियों की बर्फ से ढकी हुई लंबी श्रृंखला है, इस विशाल विस्तार में जीवन का कोई चिन्ह नहीं है, न जीवन से संबंधित किसी भी चीज का नामोनिशान है. नीले आकाश में कोई चिड़िया नहीं है. मटमैली घरती पर कोई हरकत नहीं है-चाहे कोई कितना भी सुनने का प्रयत्न करे, यहां बिलकुल सन्नाटा है, इस विशाल बियाबान में आवाज की परछाई तक नहीं है; सन्नाटे के सिवा कुछ नहीं, संपूर्ण रूप से दिल डुबोने वाला सन्नाटा.
यह कहा गया है-इस विस्तार में जीवन से संबंधित कुछ भी है, पर यह बात नहीं है. सियरा ब्लैंको से नीचे देखने पर रेगिस्तान में एक पगडंडी दिखाई देती है. जो दूर जा कर कहीं खो जाती है. उस में पहियों के निशान हैं और कई साहसियों के पैरों के निशान भी हैं. इधरउधर कुछ सफेद सी चीजें पड़ी दिखाई देती हैं, जो धूप में चमकती हैं और मटमैली धूल में अलग दिखाई पड़ती हैं. उन के पास जा कर गौर से देखो, ये हड्डियां हैं: कुछ बड़ी और खुरदुरी, कुछ छोटी और नाजुक, पहली वाली हड्डियां बैलों की हैं और दूसरे तरह की हड्डियां इनसानों की. डेढ़ हजार मीलों (2,400 कि. मी.) तक इस बदनसीब कारवां का रास्ता इन्हीं छितरे अवशेषों से मालूम किया जा सकता है, जो रास्ते में घिरते गए हैं.
4 मई, 1847 को, यह दृश्य देखता एक अकेला यात्री खड़ा था. उस का स्वरूप ऐसा था, मानो वह उस इलाके का जिन्न या दानव हो. कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता था कि वह चालीस वर्षों का है या साठ का. उस का चेहरा पतला और कुम्हलाया हुआ था और उस की भूरी, झुलसी हुई खाल उस की उभरी हड्डियों पर खिंची हुई थी, उस के लंबे, भूरे बाल और दाढ़ी में सफेदी झलक रही थी; उस की आंखें धंसी हुई थीं और उन में अस्वाभाविक चमक थी, उस के एक हाथ में राइफल थी. उस के हाथों में किसी ढांचे से ज्यादा चरबी नहीं थी. खड़ेखड़े उस ने सहारे के लिए अपने राइफल की टेक लगाई, पर फिर भी उस का लंबा चौड़ा डीलडौल इशारा कर रहा था कि कभी वह बड़ा फुरतीला रहा होगा, पर उस का पतला चेहरा और उस के कपड़े जो उस के शरीर पर झूल रहे थे, उसे इतना बूढ़ा दिखा रहे थे कि लग रहा था कि वह आदमी भूख और प्यास से मरने वाला है.
वह बहुत कष्ट उठा कर पहाड़ी दरें के नीचे उतर कर पानी ढूंढने का असफल प्रयास करने लगा, अब पूरा क्षारीय मैदान उस की आंखों के सामने फैला हुआ था, सामने की क्रूर पर्वत श्रृंखला पर कोई पेड़ या पौधा नजर नहीं आ रहा था, जिस से पास में कहीं पानी का आभास हो. दूरदूर तक कहीं भी उम्मीद की किरण नहीं दिखाई दे रही थी. उस ने बदहवास नजरों से उत्तर, पूरब और पश्चिम की ओर नजर दौड़ाई. फिर उसे महसूस हुआ कि उस की यात्रा का अंत हो गया है और वह उस बंजर दरें में मरने वाला है. "बीस साल बाद मुलायम बिस्तर पर मरना ही है, तो आज यहीं क्यों नहीं," एक चट्टान की छाया में बैठते हुए वह बुदबुदाया.
बैठने से पहले उस ने अपनी बेकार राइफल जमीन पर रखी और एक सलेटी रंग के शौल में लिपटी एक बड़ी सी गठरी भी, जो उस के दाएं कंधे पर लटकी थी, उस की ताकत के हिसाब से वह बहुत भारी थी, क्योंकि उस को नीचे रखने पर वह बहुत तेजी से जमीन पर गिरी, तत्काल ही उस सलेटी गठरी में से रोने की आवाज आई और इस में से एक नन्हा सा डरा हुआ चेहरा निकला जिस की आंखें भूरी और चमकीली थीं और फिर दो छोटीछोटी मुट्ठियां भी निकली.
"तुम ने मुझे चोट पहुंचाई है?" एक बच्चे की आवाज ने शिकायत भरी आवाज में कहा.
"क्या मुझ से ऐसा हो गया," आदमी ने क्षमा मांगते हुए कहा, "मैं ने जानबूझ कर नहीं किया था." बोलतेबोलते उस ने सलेटी शौल खोली और उस में से एक बच्ची बाहर आई, जो करीब पांच वर्ष की रही होगी. उस के प्यारे से जूते और सुंदर गुलाबी फ्रॉक दिखा रहे थे कि उस की मां ने उसे कितने प्यार से तैयार किया होगा, बच्ची पीली और कुम्हलाई थी, पर उस के हाथ और पैर स्वस्थ दिखाई दे रहे थे. लग रहा था कि उस ने अपने साथी से कम कष्ट झेले हैं.
"अब कैसी हो?" उस ने चिंता से पूछा, क्योंकि अब भी वह अपने सिर के पीछे सुनहरे बालों को रगड़ रही थी.
"इस को चूम कर ठीक कर दो," उस ने गंभीरता से अपनी चोट दिखाते हुए उस से कहा, "मां ऐसा ही करती थी. मां कहां है?"
"मां चली गई. शायद तुम भी जल्दी ही उस के पास चली जाओगी."
"गई, ओह!" बच्ची बोली, "अजीब है कि उस ने मुझ से गुडबाय भी नहीं कहा, जब वह चाय के लिए आंटियों के यहां जाती थी, तो मुझे हमेशा गुडबाय करती थी और अब तो उसे गए तीन दिन हो चुके हैं, यहां तो बड़ा सूखा है, है न? क्या पानी या कुछ खाने के लिए
नहीं है?" "नहीं, यहां कुछ भी नहीं है, डियर! तुम थोड़ी देर के लिए सब्र करो, फिर तुम ठीक हो जाओगी, अपना सिर इस तरह मुझ पर टिका लो और फिर तुम्हें बेहतर लगेगा. इस समय बोलना आसान नहीं है क्योंकि हमारे होंठ चमड़े जैसे हो रहे हैं, पर ठीक यही होगा कि मैं तुम्हें सारी बात बताऊं. यह तुम्हारे पास क्या है?"
"सुंदर सुंदर चीजें!" उत्साह से उस बच्ची ने कहा और अबरक के दो चमकते टुकड़े उठा कर दिखाए हम जब वापस घर जाएंगे तो मैं अपने भाई बॉब को दिखाऊंगी."
"तुम जल्दी ही इन से भी सुंदर चीजें देखोगी," आदमी ने विश्वास से कहा, "तुम बस थोडी देर देर रुक जाओ. हालांकि मैं तुम्हें बताने वाला था, तुम को याद है। थे?" जब हम नदी से चले
"ओह, हां."
"देखो, तब हम ने अंदाज लगाया था कि हमें जल्दी ही दूसरी नदी मिल जाएगी, पर कुछ गड़बड़ हो गई थी. हमारे कंपास या नक्शे में या कहीं और, नदी नहीं मिली. पानी खत्म हो गया, बस एकाच बूंद तुम जैसों के लिए और, और..."
"और तुम नहा नहीं पाए, उस की मित्र ने उस के गंदे शरीर को देखते हुए गंभीरता से टोका.
"नहीं, और न ही पीने को कुछ मिला. और मिस्टर बेंडर, जाने वालों में सब से पहले वही था. फिर इंडियन पीट और फिर मिसेज मैकग्रेगोर, फिर जॉनो हाँस और फिर बिटिया, तुम्हारी मां."
"तो मरने वालों में मां भी शामिल है, बच्ची बोल उठी, अपनी फ्रॉक में मुंह छुपा कर तरह रोने लगी.
"हां, वे सब चले गए, मेरे और तुम्हारे अलावा, फिर मैं ने सोचा कि इस ओर पानी की कुछ उम्मीद हो सकती है, इसलिए मैं ने तुम को अपने कंधे पर उठाया और हम दोनों साथसाथ यहां तक आए. पर ऐसा नहीं लग रहा है कि हालात सुधरेंगे, अब तो हमारे पास छोटी सी भी उम्मीद नहीं है!"
"क्या आप का मतलब है कि हम भी मरने वाले हैं?" बच्ची ने अपनी सिसकियां दबाई और आंसू भरा चेहरा उठा कर पूछा.
"मेरे खयाल से ऐसा ही है."
"आप ने पहले ऐसा क्यों नहीं कहा?" खुशी से हंसते हुए उस ने पूछा, "आप ने मुझे कितना डरा दिया था. अब जब हम मरेंगे, तो हम फिर से मां के साथ होंगे." "हां, तुम मां के पास होगी, बेटी."
"और आप भी. में उन को बताऊंगी कि आप कितने अच्छे हैं. मुझे पक्का मालूम है कि वह स्वर्ग के दरवाजे पर पानी का घड़ा और गेहूं की ढेर सारी गरम और दोनों और सेंकी हुई चपातियां लिए खड़ी होगी, जो बॉब और मुझे अच्छी लगती हैं."
"मुझे नहीं मालूम, ज्यादा समय नहीं लगेगा." आदमी की आंखें उत्तर की ओर के क्षितिज पर टिकी थीं. आसमान के नीले मंडल में तीन छोटे बिंदु नजर आए थे, जो हर पल बढ़ते जा रहे थे और तेजी से पास आते प्रतीत हो रहे थे. जल्दी ही वे तीन बिंदु तीन बड़ी भूरी चिड़ियों में बदल गए, जो इन दो यात्रियों के सिरों के ऊपर मंडराने लगीं और फिर ऊपर के कुछ चट्टानों पर बैठ गईं, ये थीं बजर्ड, यानी पश्चिम के गिद्ध, जिन का प्रकट होना मौत का सूचक है.
"मुरगे और मुरगियां," उन के मृत्यु सूचक आकार को देख कर बच्ची खुशी से चिल्ला पड़ी और तालियां बजा कर उन को उठाने की कोशिश करने लगी. "कहो, क्या भगवान ने यह जगह बनाई है?"
"हां, बनाई तो है." उस के साथी ने इस अप्रत्याशित सवाल पर चौकते हुए कहा.
"भगवान ने इलिनोयस बनाया और उस ने मिसूरी भी बनाई," लड़की आगे बोली, "मुझे लगता है कि यह जगह किसी और ने बनाई है, यह जगह उन जगहों की तरह सुंदर नहीं है. यहां पर वे लोग पानी और पेड़ बनाना भूल गए हैं."
"तुम प्रार्थना क्यों नहीं कर रही?" आदमी ने झिझक से पूछा.
"अभी रात नहीं हुई है," उस ने जवाब दिया.
"इस से कोई फर्क नहीं पड़ता. ऐसा आमतौर पर नहीं होता, पर ईश्वर इस का बुरा नहीं मानेगा, तुम अपनी वही प्रार्थनाएं करो जो तुम हर रात अपने वैगन में करती थी, जब हम मैदान में थे."
"तुम खुद घोड़ी प्रार्थना क्यों नहीं करते?" बच्ची ने अचरज भरी नजरों से पूछा,
"मैं उन को भूल गया हूं," उस ने जवाब दिया, "मैं ने तब से पूजा नहीं की है जब से में इस राइफल के आधे नाप का था. पर मुझे लगता है कि किसी भी काम के लिए कभी भी 'बहुत देर हो गई' नहीं समझना चाहिए, तुम अपनी प्रार्थनाएं गाओ और मैं यहां खड़ा हो कर तुम्हारे पीछेपीछे दोहराता रहूंगा."
"फिर तो तुम्हें घुटनों के बल बैठना होगा, और मुझे भी," वह इस काम के लिए अपना शौल बिछाते हुए बोली, "तुम को अपने हाथ इस तरह उठाने हैं. इस से तुम को अच्छा महसूस होगा,"
बड़ा विचित्र नजारा था, परंतु वहां गिद्धों के अलावा और कोई भी देखने वाला नहीं था. पतली सी शील पर दोनों यात्री बैठे थे, छोटी सी बातूनी बच्ची बेपरवाह, कठोर और साहसी, उस का गोलमटोल चेहरा और उस के कठोर, पतले नाकनक्श, बादलरहित आसमान की ओर उठे, दिल से फरियाद कर रहे थे, उस भगवान से जिस से सभी प्राणी डरते हैं, जबकि दोनों आवाजें एक पतली और स्पष्ट, दूसरी भारी और कठोर, मिल कर दया और माफी की भीख मांग रही थीं. प्रार्थना खत्म हुई और वे वापस चट्टान की छाया में जा कर बैठ गए,
फिर बच्ची अपने रक्षक के सीने पर सिर रख कर सो गई. थोड़ी देर वह उसे सोता हुआ देखता रहा, पर प्रकृति उस से अधिक बलवान थी, तीन दिन और तीन रातों तक वह न सोया और न आराम किया, धीरेधीरे उस की पलकें उस की थकी हुई आंखों पर मुंद गई और सिर धीरेधीरे सीने पर झुकता गया और आदमी की सफेद काली दाढ़ी बच्ची की सुनहरी लटों से मिल गई और दोनों एक समान गहरी और स्वप्नरहित नींद सोते रहे.
यदि यात्री आधे घंटे तक और जगा रहता, तो उस की आंखों को एक अजीब नजारा देखने को मिलता, क्षारीय मैदान के अंतिम छोर पर हलकी सी धूल उड़ी, जो पहले इतनी हलकी थी कि दूर का कोहरा लग रही थी, पर धीरेधीरे यह धूल ऊंची और चौड़ी होती गई और एक ठोस, स्पष्ट बादल बन गई. यह बादल आकार में बढ़ता गया और फिर यह साफ हो गया कि यह गुबार बहुत सारे प्राणियों के एक साथ चलने से उठा है.
अन्य किसी उपजाऊ जगह में देखने वाले को लगता जंगली भैंसों का विशाल झुंड घास के मैदानों में चरने आ रहा है, पर इस बंजर रेगिस्तान में इस की संभावना बिलकुल नहीं थी, जैसेजैसे वह धूल का गुबार उस चट्टान तक आ पहुंचा, जहां वे दोनों सो रहे थे, तो धूल में से कैनवस ढकी गाड़ियां और सशस्त्र घुड़सवार दिखाई पड़ने लगे और फिर पता चला कि यह पश्चिम की ओर जाता हुआ कोई विशाल कारवां है. पर क्या कारवां था। जब उस का एक सिरा पहाड़ की तलहटी पर पहुंच गया, तो भी दूसरा सिरा क्षितिज में दिखाई तक नहीं पड़ रहा था. उस विशाल मैदान में गाड़ियां, घुड़सवार और पैदल लोग धीरेधीरे चले आ रहे थे. बहुत सी औरतें अपनेअपने बोझों को संभालती लड़खड़ाती आ रही थीं और बच्चे उन गाड़ियों के साथसाथ या तो पैदल दौड रहे थे या सफेद परदों में से झांक रहे थे. यह इस देश से दूसरे देश तक जाने वाले कोई साधारण लोग नहीं थे,
ये कोई खानाबदोश थे जो परिस्थितियों की मार खा कर किसी नई जगह की खोज में निकलने को मजबूर हुए थे. साफ माहौल में इनसानों के इस विशाल सागर की परेशान बदहवास आवाजें गूंज रही थीं, पहिए चरमरा रहे थे और घोड़े हिनहिना रहे थे. वे आवाजें तेज जरूर थीं, पर इतनी तेज नहीं हो पाई कि ऊपर सो रहे दोनों यात्रियों को जगा सकें.
पंक्ति के शुरू में बीस या इस से कुछ ज्यादा, गंभीर, कठोर चेहरों वाले, हाथ से काते गए साधारण कपड़े पहने और राइफल हाथ में लिए घुड़सवार थे. चट्टान की तलहटी पर पहुंच कर वे रुके और आपस में सलाहमशविरा करने लगे.
"कुएं दाईं ओर हैं, मेरे भाइयो," भिंचे होंठ अधपके बालों वाले एक आदमी ने कहा, जिस की दाढ़ीमूंछ नहीं थीं.
"सियरा ब्लैंको के दाईं ओर जिस से हम रियो ग्रैंडे पहुंच सकते हैं." दूसरा बोला, "पानी की चिंता मत करो" एक तीसरा बोला, "वह जो चट्टानों से पानी निकाल सकता है,अपने प्रिय भक्तों को ऐसे ही नहीं छोड़ देगा."
"आमीन, आमीन!" पूरी पार्टी में प्रतिक्रिया हुई.
वे अपनी यात्रा शुरू करने ही वाले थे कि उन में सब से छोटों में एक तीव्र दृष्टि वाला अचानक चिल्ला उठा और उस ने ऊपर की चट्टान की ओर इशारा किया, चट्टान की चोटी पर, गुलाबी सा कुछ बदरंग चट्टानों के बीच चमक रहा था. उस को देखते ही घोड़ों की लगामें कसी गईं और बंदूकें तन गईं और ताजा घुड़सवार आगे बढ़ने लगे, हर होंठ पर 'रेडस्किन' शब्द चढ़ा था.
"यहां पर बहुत ज्यादा अमेरिकन भारतीय नहीं हो सकते, बुजुर्ग आदमी ने कहा जो नेतृत्व कर रहा था. हम पौनियों को पार कर आए हैं और विशाल पर्वतों को पार कर लेने तक कोई और कबीले नहीं पड़ते."
"क्या में आगे जा कर देखें, ब्रदर स्टेजरसन, जत्थे में से एक ने कहा,
"और में," "और में," दरजनों आवाजें बोल पड़ीं ."अपने घोड़े नीचे छोड़ जाओ, और हम यहीं पर तुम्हारा इंतजार करेंगे, बुजुर्ग ने जवाब दिया, पलभर में वे युवक अपने घोड़ों से नीचे उतरे, घोड़ों को बांधा और खतरनाक ढलान पर ऊपर चढ़ने लगे. उस चीज की ओर जिस की ओर उन का कौतूहल जागा था. वे शीघ्रता और चुपके से आगे बढ़ रहे थे और उन के आत्मविश्वास और निपुणता को देख कर लग रहा था मानो तजुर्बेकार स्काउट हॉ. नीचे खड़े दर्शक देख सकते थे कि कैसे वे एक चट्टान से दूसरी चट्टान की और छलांग लगा रहे थे. फिर उन की आकृतियां ऊपर नजर आने लगीं. वह युवक जिस ने सब का ध्यान आकर्षित किया था, उन का नेतृत्व कर रहा था. अचानक उस के पीछे चलने वालों ने देखा कि उस ने अचरज से हाथ उठा दिए और उस के पास पहुंचने पर वे भी उस दृश्य से उसी तरह प्रभावित हुए.
बंजर पहाड़ के एक छोटे से पठार पर एक बहुत बड़ी चट्टान थी और इस चट्टान के सहारे एक लंबा, लंबी दाढ़ी और कठोर नाकनक्श वाला, पर बेहद कमजोर आदमी लेटा है. उस का शांत चेहरा और नियमित सांसें बता रही थी कि वह गहरी नींद में सो रहा है. उस के करीब ही एक नन्ही बच्ची थी, जिस के गोल, सफेद हाथ आदमी के भूरे गले में लिपटे थे और सुनहरे बालों वाला उस का सिर उस के शनील के कुरते की छाती पर टिका था. उस के गुलाबी होंठ खुले थे जिस के अंदर से उस के दूधिया सफेद दांत चमक रहे थे और उस के मासूम चेहरे पर एक चंचल मुसकान थी, उस के गबदू से सफेद पैर, जिन में वह सफेद मोजे और चमकीले बकल वाले साफ जूते पहने थी, उस के साथी के मुरझाए अंगों से मेल नहीं खा रहे थे. इस चढ़ान के ऊपर तीन गंभीर गिद्ध थे, जो नवागंतुकों को देख कर निराशा से चीत्कार करते, बेमन से वहां से उड़ गए.
उन घिनौने पक्षियों के शोरगुल से दोनों सोने वाले जाग गए और बदहवास से इधरउधर ताकने लगे, आदमी लड़खड़ाता हुआ अपने पैरों पर खड़ा हुआ और नीचे मैदान की देखने लगा जो उस वक्त बिलकुल खाली था जब वह सोया था और अब वह आदमी, औरतों और जानवरों से भरा था. उस के चेहरे पर अविश्वास का भाव झलकने लगा और उस ने अपना हड्डी जैसा हाथ आंखों पर फेरा, "इसी को शायद अवसाद कहते हैं," वह बुदबुदाया, बच्ची उस के कोट का निचला हिस्सा पकड़े उस के पास खड़ी थी. वह कुछ नहीं बोली, पर बचपन की प्रश्नवाचक, कौतूहल भरी दृष्टि से चारों तरफ देखती रही.
बचाव पक्ष जल्दी ही दोनों भटके हुए यात्रियों को आश्वस्त करने में सफल हो गया कि वे लोग वास्तव में वहां हैं, कोई भ्रम नहीं है. उन में से एक ने बच्ची को उठा कर अपने कंधों पर बैठा लिया जबकि दो अन्यों ने उस के कमजोर साथी को सहारा दिया और दोनों को गाड़ियों की ओर ले कर चले.
"मेरा नाम जॉन फेरियर है," यात्री ने बताया, मैं और यह नन्ही बच्ची ही इक्कीस लोगों के जत्थे में जिंदा बच्चे हैं. बाकी सब भूख और प्यास से मर चुके हैं."
"क्या यह तुम्हारी बच्ची है?" किसी ने पूछा, "मुझे लगता है कि शायद यह अब मेरी हो गई है," दूसरे ने कहा, "यह मेरी है क्योंकि मैं ने इसे बचाया है. कोई भी इसे मुझ से अलग नहीं कर सकता, आज के बाद यह लूसी फेरियर है, पर आप लोग कौन हैं?"
कौतूहल से उन बचाने वालों की ओर नजर डालता हुआ वह बोला, "ऐसा लगता है कि तुम लोग संख्या में काफी हो."
"लगभग दस हजार," एक युवक बोला, "हम प्रभु की संतान हैं, फरिश्ते मेरोना के प्रिय."
"मैं ने कभी इन का नाम नहीं सुना," यात्री बोला, "ऐसा लगता है कि उस प्रभु ने काफी बड़ी भीड़ को चुना है."
"जो पवित्र है, उस का मजाक मत उड़ाओ," दूसरे ने सख्ती से कहा, "हम उन में से हैं, जो उन पवित्र ग्रंथों में विश्वास रखते हैं, जो मिस्र की लिपि में सोने की पतलीपतली प्लेटों पर लिखी गई हैं. जो जोजफ स्मिथ को पामीरा में सौंपी गई थीं. हम नौवू से आए हैं, जो इलिनोयस प्रदेश में है, जहां हम ने अपने मंदिर की स्थापना की है. हम हिंसक आदमी और नास्तिकों से भाग कर यहां शरण लेने आए हैं, जबकि यह रेगिस्तान के बीचोंबीच है.
" जॉन फेरियर के मन में नौवू का नाम सुनते ही कई यादें ताजा हो गईं, "अच्छा," वह बोला,
"तुम मॉरमॉन लोग हो." "हम मॉरमॉन ही हैं," बाकी लोग एक स्वर में बोले. "और तुम कहां जा रहे हो?"
"हम को नहीं मालूम, हमारे पैगंबर के रूप में प्रभु का हाथ हमें कहीं ले जा रहा है. तुम को उस के सामने आना पड़ेगा, वही बताएगा कि तुम्हारे साथ क्या करना होगा."
इस समय तक वे पहाड़ की तलहटी पर पहुंच चुके थे और यात्रियों से घिर गए-पीले चेहरों वाली सहमी सी औरतें, तंदुरुस्त, खिलखिलाते बच्चे और चिंतित, चौकन्नी नजरों वाले पुरुष, उन के बीच से अचरज और करुणा के अनेक स्वर उभरे, जब उन्होंने एक अजनबी की नाजुक उमर देखी और दूसरे की लाचारी, पर उन को यहां तक लाने वाले रुके नहीं, भीड़ को ठेलते आगे बढ़ते गए, उन के पीछे पीछे मॉरमॉनों की भीड़ चली.
वे एक गाड़ी तक पहुंचे, जो अपने विशाल आकार, चटकीले रंग और खूबसूरती की वजह से स्पष्ट नजर आ रही थी. उस पर छह घोड़े जुते थे, जबकि दूसरी गाड़ियों में दो या ज्यादा से ज्यादा चार घोड़े जुते थे. गाड़ीवान के पास एक आदमी बैठा था, जो उमर में तीस साल से ज्यादा का नहीं रहा होगा, पर उस का बड़ा सा सिर और दृढ़ भाव दिखा रहे थे कि वही इन सब का सरदार है. वह कत्थई रंग की कोई किताब पढ़ रहा था, जब भीड़ उस के पास पहुंची, उस ने वह किताब एक तरफ रख दी और ध्यान से सारी घटना सुनने लगा फिर वह उन भटके हुए यात्रियों की ओर मुड़ा.
"अगर हम तुम को अपने साथ ले जाते हैं, गंभीर शब्दों में उस ने कहा, "तो सिर्फ हमारे धर्म को मानने वालों के रूप में ही, हम अपने बीच भेड़िए नहीं रख सकते. बेहतर होगा कि तुम्हारी हड्डियां इस बियाबान में सूखें, बजाए इस के कि तुम वह सड़ांध बनो जो समय के साथ सारे फल को सड़ा देता है. क्या तुम इन शर्तों पर हमारे साथ आना चाहोगे?"
"मैं सोचता हूं कि मैं किसी भी शर्त पर आप के साथ चलने को तैयार हूं, फेरियर ने इतना जोर दे कर कहा कि गंभीर मुद्रा वाले बुजुर्ग बिना मुसकाए नहीं रह सका. सिर्फ सरदार अपनी गंभीरता का भाव मुंह पर ओढ़े रहा.
"इस को कबूल कर लो, ब्रदर स्टेंजरसन!" उस ने कहा. "इस को खाना और पानी दो और बच्ची को भी. तुम्हारा काम यह भी है कि तुम अपनी जाति के पवित्र तौरतरीके इस को सिखाओ. हम पहले ही काफी देर कर चुके हैं. आगे बढ़ो! जियोन की ओर, जियोन की ओर!"
"जियोन की ओर, जियोन की ओर!" मॉरमॉनों की भीड़ चिल्लाई और पूरे कारवां में ये शब्द लहर की तरह उठे, एक मुंह से दूसरे मुंह तक और आखिर में बहुत दूरी पर एक फुसफुसाहट बन कर रह गए, चाबुक तन गए और पहिए चरमराने लगे. बड़ीबड़ी गाड़ियां चल पड़ीं और पूरा कारवां एक बार फिर से हरकत में आ गया. जिस बुजुर्ग के सुपुर्द दोनों कमजोर प्राणी किए गए थे, वह अपने कारवां में उन को ले गया, जहां उन के लिए भोजन पहले से ही तैयार रखा था.
"तुम यहां पर रहोगे," वह बोला, "कुछ ही दिनों में तुम्हारी थकान उतर जाएगी. फिलहाल याद रखना कि अब और हमेशा के लिए तुम हमारे धर्म के हो. ब्रिगहम यंग ने कह दिया है और उस ने जोजफ स्मिथ की आवाज में कहा है, जो प्रभु की आवाज है."